बस्तर में जनआक्रोश: लाल मिट्टी परिवहन के खिलाफ एकजुट हुए लोग
खेती और पर्यावरण पर संकट
सुकमा|मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से चेताया है कि निजी भूमि पर लाल मिट्टी के निस्तारण से गंभीर जल प्रदूषण फैल सकता है। इसका सबसे बुरा असर स्थानीय कृषि और पेयजल स्रोतों पर पड़ेगा।
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नदी पर खतरा: संगठन का कहना है कि शबरी नदी, जो क्षेत्र की जीवनरेखा है, इस परियोजना के कारण प्रदूषित हो सकती है।
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भविष्य की चिंता: ग्रामीणों को डर है कि यदि यह काम जारी रहा, तो आने वाले समय में क्षेत्र में बड़ी पर्यावरणीय त्रासदी आ सकती है।
पुराने वादों की अनदेखी का आरोप
संगठन ने कंपनी पर पुराने समझौतों को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया है। ज्ञापन में कहा गया कि:
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वर्ष 2005 से कंपनी शबरी नदी के पानी का उपयोग कर रही है, लेकिन इसके बदले किए गए वादे अधूरे हैं।
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समझौते के तहत प्रभावित गांवों के विकास (स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली) के लिए प्रति वर्ष लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, जो कागजों तक ही सीमित रह गए।
गहरा सकता है जल संकट
पाइपलाइन विस्तार योजना को लेकर भी मोर्चा ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन का दावा है कि यदि पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाई गई, तो कंपनी नदी से अधिक पानी खींचेगी। इससे सुकमा जिले में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। स्थानीय संसाधनों पर बढ़ता बोझ भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
प्रशासन को अल्टीमेटम
बस्तरिया राज मोर्चा के जिला प्रभारी रामा सोड़ी ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुराने वादे पूरे नहीं होते और बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जातीं, तब तक नई परियोजनाओं को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में कठोर कदम उठाने की अपील की है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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