अनियंत्रित यूनिपोल के खिलाफ लामबंदी, सरकारी नीति को बताया जनविरोधी
जबलपुर। मध्य प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में राजस्व (सरकारी खजाना) बढ़ाने के उद्देश्य से होर्डिंग और यूनिपोल की संख्या में इजाफा करने के नए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के खिलाफ अब जमीनी स्तर पर तीखा विरोध और असंतोष पनपने लगा है। संस्कारधानी जबलपुर में अनियंत्रित और बेतरतीब ढंग से लगाए जा रहे इन विशाल विज्ञापन पटलों के कारण शहर के भीतर पूर्व में कई भयावह और जानलेवा सड़क हादसे भी हो चुके हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर जबलपुर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के वरिष्ठ पदाधिकारियों डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया और गीता पांडे ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को एक औपचारिक लिखित आपत्ति पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए हालिया विभागीय समीक्षा बैठक में जारी किए गए आदेशों को आम नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद आत्मघाती और चिंताजनक बताया गया है। संस्था का स्पष्ट मत है कि बिना किसी ठोस और वैज्ञानिक कार्ययोजना के विज्ञापनों का दायरा बढ़ाने से शहरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और रोजमर्रा के सफर में हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
नियमों को ठेंगा दिखाकर मनमाने ढंग से हो रहा काम, फाइलों में दबी जांच रिपोर्ट
वर्तमान समय में विभिन्न नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे विज्ञापन पटल 'आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017' की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा पूर्व में दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने एक विशेष जांच दल का गठन किया था। इस जांच दल ने धरातल पर व्यापक छानबीन और तकनीकी मूल्यांकन करने के बाद 13 जून 2025 को अपनी अंतिम विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दी थी।
बेहद हैरान करने वाली बात यह है कि इस महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट को आए हुए पूरा 1 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है, परंतु जिम्मेदार उच्च पदस्थ अफसरों ने अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और रसूखदारों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की है। इसी प्रशासनिक शिथिलता के कारण शहरों में अवैध और खतरनाक होर्डिंग का यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
इलाहाबाद बैंक चौराहे पर हुए जानलेवा हादसे के बाद भी पुलिस मौन
सड़कों और चौराहों के ठीक मुहाने पर खड़े किए गए भारी-भरकम लोहे के यूनिपोल राहगीरों और वाहन चालकों की जान के लिए सबसे बड़ा काल बनकर उभर रहे हैं। जबलपुर शहर के व्यस्ततम इलाहाबाद बैंक चौराहे के समीप 18 जनवरी 2025 को एक ऐसा ही भीषण हादसा हुआ था, जिसमें एक बेकसूर नागरिक को असमय अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
इस दुखद घटना को बीते हुए 1 वर्ष से अधिक की समयावधि निकल चुकी है, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा इस मामले में अब तक संबंधित विज्ञापन एजेंसी या दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) तक दर्ज नहीं की जा सकी है। इस घोर लापरवाही के चलते आज तक हादसे की वैधानिक जवाबदेही तय नहीं हो पाई और न ही पीड़ित परिवार को कोई कानूनी न्याय मिल सका है। उपभोक्ता मंच ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इंसानी जिंदगी की कीमत पर सिर्फ राजस्व बढ़ाने के इस अव्यावहारिक फैसले को जनहित में तत्काल वापस लिया जाए।

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