इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में कंपनियों की बढ़ी दिलचस्पी
इंदौर|भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी NH-752D परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. बदनावर–पेटलावद–थांदला–टिमरवानी चार-लेन कॉरिडोर के निर्माण के लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद निविदा प्रक्रिया में उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली है. इस परियोजना के लिए कुल 21 निविदाएं प्राप्त हुई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ गुणवत्ता और लागत नियंत्रण की उम्मीद भी मजबूत हुई है|
कॉरिडोर बनने के बाद समय की होगी बचत
करीब 3,839.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा. मौजूदा 88.33 किमी लंबे मार्ग को अपग्रेड कर चार-लेन बनाया जाएगा, जिसमें ज्यामितीय सुधार और नए बाईपास शामिल होंगे. प्रस्तावित रीयलाइनमेंट के बाद मार्ग की लंबाई घटकर 80.45 किमी रह जाएगी, जिससे लगभग 7.88 किमी की दूरी कम होगी और यात्रा समय में करीब 1 घंटे की बचत संभव होगी|
उद्योगों को तेज परिवहन सुविधा मिलेगी
परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह मार्ग सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़कर मध्य भारत को पश्चिमी व्यापारिक गलियारों से जोड़ेगा. इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और उद्योगों को तेज परिवहन सुविधा मिलेगी. साथ ही यह मार्ग NH-52 के साथ मिलकर एक मजबूत पूर्व–पश्चिम आर्थिक कॉरिडोर के रूप में उभरेगा|
PM MITRA टेक्सटाइल पार्क को मिलेगा लाभ
धार जिले के भैंसोला में विकसित PM MITRA टेक्सटाइल पार्क को भी इस सड़क से सीधा लाभ मिलेगा. 2,158 एकड़ में फैले इस टेक्सटाइल पार्क के जरिए “5F” मॉडल (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और करीब 3 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है|
इन इलाकों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे धार और झाबुआ जिलों के कई कस्बों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी|
पर्यटन क्षेत्र में भी होगा फायदा
पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद अहम है. इससे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, मांडू और महेश्वर जैसे प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच और आसान व सुरक्षित होगी. इससे पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा|
अंतर-राज्यीय व्यापार को गति मिलेगी
रणनीतिक रूप से यह मार्ग मध्य प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात से बेहतर रूप से जोड़ेगा, जिससे अंतर-राज्यीय व्यापार और माल परिवहन को गति मिलेगी. इंदौर, पीथमपुर और रतलाम जैसे औद्योगिक केंद्रों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित होगा|
कुम्भ मेला से पहले निर्माण होगा पूरा
सरकार की योजना है कि इस परियोजना को इसी वित्तीय वर्ष में अवॉर्ड कर दिया जाए, ताकि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुम्भ मेला से पहले इसका निर्माण पूरा किया जा सके. कुल मिलाकर, NH-752D कॉरिडोर न सिर्फ एक सड़क परियोजना है, बल्कि यह क्षेत्रीय आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है|

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