रुद्रप्रयाग: ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के दर्शनों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। कल यानी बुधवार, 22 अप्रैल की सुबह ठीक 8 बजे मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बाबा के स्वागत के लिए पूरी केदारपुरी को क्विंटल फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है।

भक्ति और उत्साह का सैलाब

कपाट खुलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। सोमवार को बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली फाटा, बड़ासू और सीतापुर होते हुए शाम को गौरीकुंड पहुँची। रास्ते भर भक्तों ने डोली का भव्य स्वागत किया। सेना के बैंड की सुरीली धुन और 'बम-बम भोले' के जयघोष ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को शिवमय कर दिया है।

यात्रा से पहले जान लें जमीनी हकीकत

भले ही भक्तों की आस्था चरम पर है, लेकिन धरातल पर कुछ चुनौतियां भी खड़ी हैं। यदि आप भी इन दिनों केदारनाथ जाने का मन बना रहे हैं, तो इन बातों पर गौर करना जरूरी है:

  • संकरे रास्ते: गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का पैदल मार्ग कई जगहों पर काफी संकरा है, जिससे आवाजाही में परेशानी हो रही है।

  • अत्यधिक भीड़: शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक देखी जा रही है। धाम और पैदल मार्ग पर तिल धरने की भी जगह नहीं बची है।

  • जाम की समस्या: केदारनाथ मार्ग पर जगह-जगह जाम की स्थिति बनी हुई है, जिससे यात्रियों का पैदल चलना भी दूभर हो रहा है।

सावधानी की सलाह

प्रशासन और जानकारों का सुझाव है कि जो भक्त अभी यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे कुछ दिनों का इंतजार कर सकते हैं। शुरुआती भीड़ छंटने के बाद यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित होगी। हालांकि, इन तमाम दिक्कतों के बावजूद भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है और केदार घाटी पूरी तरह शिव भक्ति के रंग में डूबी हुई है।