तमिलनाडु: TVK में आरोप-प्रत्यारोप का दौर, महिला नेत्री ने हाईकोर्ट का रुख किया
चेन्नई। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सामने अब उनकी अपनी ही पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के भीतर से ही बगावत के सुर उठने लगे हैं। विल्लुपुरम जिले में सरकारी वकीलों की भर्ती में करीब 30 लाख रुपये तक की घूसखोरी का आरोप लगाते हुए TVK की ही एक महिला सदस्य ने मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस याचिका में खुद मुख्यमंत्री विजय और उनके कानून विभाग को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया है।
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही लिस्ट लीक
विल्लुपुरम में प्रैक्टिस करने वाली वकील एम. ज्ञानसुंदरी ने इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दावा किया गया है कि विल्लुपुरम जिले में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 29 जून की शाम 5:45 बजे तक थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि उसी दिन दोपहर 12:11 बजे ही, यानी समय सीमा खत्म होने से पहले ही, चुने गए उम्मीदवारों की एक लिस्ट व्हाट्सएप पर वायरल हो गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन उन्हें इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई।
पदों के लिए 5 से 30 लाख रुपये की घूस का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से इस पूरी भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हर एक पद के लिए 5 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की गई है। महिला वकील का दावा है कि जब उन्होंने इस वायरल सूची को लेकर अपनी पार्टी के जिला सचिव से बात की, तो उन्हें साफ कह दिया गया कि यही फाइनल लिस्ट है। आरोप यह भी है कि नियमों को ताक पर रखकर दूसरी पार्टियों से जुड़े वकीलों को इन पदों के लिए चुन लिया गया है।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को बनाया गया पक्षकार
इस मामले में मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय के साथ-साथ राज्य के कानून विभाग, विल्लुपुरम के जिला कलेक्टर और पार्टी के अन्य बड़े पदाधिकारियों को भी आरोपी (पक्षकार) बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सीएम विजय हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ बात करते हैं, लेकिन उनके नाक के नीचे अधिकारी खुलेआम गैर-कानूनी तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने हाई कोर्ट से मांग की है कि इस भर्ती के नोटिफिकेशन पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जाए और उन्हें भी निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाए।

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