शंघाई में भारत-चीन संवाद: संस्कृति और पर्यटन को नई दिशा देने की योजना
शंघाई: पूर्वी चीन में भारत और चीन के लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शंघाई में भारत के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने चीन के एक वरिष्ठ सांस्कृतिक अधिकारी के साथ विशेष बैठक की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को और ज्यादा विस्तार देना है।
'अतुल्य भारत' अभियान और पर्यटन पर चर्चा
बैठक के दौरान भारतीय महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने गुओयुन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत केंद्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) झांग जियाक्सिंग से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की। इस चर्चा में मुख्य रूप से भारत सरकार के "अतुल्य भारत" (इन्क्रेडिबल इंडिया) अभियान के तहत चीनी पर्यटकों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार किया गया, ताकि चीन से अधिक से अधिक लोग भारत के पर्यटन स्थलों का दीदार करने पहुंच सकें।
सांस्कृतिक विरासत बनेगी मजबूत कड़ी
दोनों अधिकारियों के बीच हुई इस बातचीत में इस बात पर विशेष सहमति बनी कि पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों के रिश्तों को जोड़ने का एक मजबूत जरिया है। दोनों पक्षों ने जोर देकर कहा कि अपनी-अपनी समृद्ध और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासतों का सही उपयोग करके न केवल आपसी समझ को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि द्विपक्षीय और सामाजिक संबंधों को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाया जा सकता है।

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