ग्लोबल शेयर बाजार रैंकिंग में भारत की रैंकिंग गिरी: ताइवान के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी पछाड़ा, जानिए क्यों आई यह गिरावट
मुंबई | ग्लोबल इक्विटी मार्केट (वैश्विक शेयर बाजार) से भारतीय निवेशकों के लिए एक मायूस करने वाली खबर आई है। कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के पैमाने पर भारत अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों की एलीट लिस्ट से बाहर हो गया है। भारतीय शेयर बाजार को सिर्फ सात दिनों के भीतर दो बड़े झटके लगे हैं। पहले ताइवान ने भारत को पछाड़ते हुए पांचवें पायदान पर कब्जा जमाया और अब दक्षिण कोरिया ने भी लंबी छलांग लगाकर भारत को पीछे छोड़ दिया है। इस उथल-पुथल के बाद भारत अब वैश्विक रैंकिंग में खिसककर सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
बाजार का नया समीकरण: 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ दक्षिण कोरिया की बड़ी छलांग
ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए ताजा वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में इस साल अभूतपूर्व और ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है। दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मूल्यांकन 86 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 5 ट्रिलियन (50 खरब) डॉलर के पार पहुंच गया है। इस तूफानी रफ्तार के दम पर उसने कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे दिग्गज बाजारों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है, जिसके चलते भारत छठे से सातवें स्थान पर आ गया। वहीं, ताइवान अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार बनकर मजबूती से टिका हुआ है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया की तेजी का राज: एआई बूम और सेमीकंडक्टर की बादशाहत
इन दोनों एशियाई देशों के शेयर बाजारों में आई इस ऐतिहासिक तेजी का पूरा सेहरा 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और सेमीकंडक्टर (चिप) बनाने वाली कंपनियों के सिर जाता है। दक्षिण कोरियाई बाजार की इस चमक के पीछे 'सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स' और 'एसके हाइनिक्स' जैसी महाकाय कंपनियां हैं। एआई मेमोरी-चिप तकनीक में अपना दबदबा होने के कारण इन दोनों कंपनियों का संयुक्त वैल्यूएशन हाल ही में 1 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया, जिससे वहां के 'कोस्पी इंडेक्स' ने साल 2026 में 100% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। वहीं, ताइवान की ताकत दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी 'टीएसएमसी' (TSMC) है। इस साल इस अकेले कंपनी के शेयरों में 46% का उछाल आया है और ताइवान के मुख्य सूचकांक में इसकी हिस्सेदारी लगभग 42% है।
भारतीय बाजार के पिछड़ने के कारण और मजबूत जीडीपी का सुरक्षा कवच
भारत के सातवें स्थान पर खिसकने के पीछे कुछ तात्कालिक और वैश्विक चुनौतियां जिम्मेदार हैं। इनमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा बाजार से लगातार की जा रही भारी बिकवाली और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी मुख्य हैं। इसके अलावा, वैश्विक निवेशक आज एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में दिल खोलकर पैसा लगा रहे हैं, जबकि भारतीय शेयर बाजार में ऐसी टेक कंपनियों की भारी कमी है। हालांकि, शेयर बाजार की इस रैंकिंग के बावजूद भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था अब भी बेहद मजबूत है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत की जीडीपी का आकार 4.15 ट्रिलियन डॉलर है, जो दक्षिण कोरिया की जीडीपी (1.93 ट्रिलियन डॉलर) से दोगुनी से भी ज्यादा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण कोरिया की यह तेजी पूरी तरह से सेमीकंडक्टर साइकिल पर टिकी है, जबकि भारत अपनी मजबूत जीडीपी ग्रोथ और घरेलू मांग के दम पर लंबी अवधि के लिए एक बेहद सुरक्षित और मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

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