थलापति के मैदान में उतरते ही सियासी खेल पलटा, ‘विजय’ पर सस्पेंस
विजय का चर्चित संवाद "ओंगा विजय, ना वरें विसिल अडिक्का रेडीया?" (आपका विजय आ रहा है, क्या आप सीटी बजाने को तैयार हैं?) आज पूरे राज्य में युवाओं के लिए एक चुनावी मंत्र बन गया है। उनके रोड शो में उमड़ता जनसैलाब उनकी लोकप्रियता की गवाही दे रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस भीड़ को 'वोट' में तब्दील होने की चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
चुनावी रणक्षेत्र: दो सीटों से ताल ठोक रहे हैं विजय
विजय ने रणनीतिक रूप से दो महत्वपूर्ण सीटों को अपनी चुनावी शुरुआत के लिए चुना है:
पेरम्बूर (Perambur): यहाँ उनका सीधा मुकाबला डीएमके (DMK) के आरडी शेखर से है। यह सीट चेन्नई की राजनीति का अहम हिस्सा है।
तिरुचिरापल्ली ईस्ट (Tiruchirappalli East): यहाँ विजय एक कड़े त्रिकोणीय संघर्ष में हैं, जहाँ उनका सामना डीएमके के इन्निगो एस. इरुदयाराज और एआईएडीएमके के के. राजशेखरन से हो रहा है।
TVK की ताकत और चुनौतियां
विजय की पार्टी सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिससे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) दोनों के समीकरण बिगड़ने तय हैं।
मजबूत पक्ष: युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं का भारी समर्थन। अल्पसंख्यकों के बीच विजय की पहुंच और सत्ता विरोधी वोटों (Anti-incumbency) का उनकी ओर आकर्षित होना।
कमजोर कड़ी: स्थापित दलों की तुलना में टीवीके की 'इलेक्शन मशीनरी' (बूथ प्रबंधन और जमीनी नेटवर्क) अभी शुरुआती दौर में है।
वोट शेयर का गणित: अनुमान है कि टीवीके 16% से 18% तक वोट हासिल कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करने के लिए पर्याप्त होगा।
क्या विजय बनेंगे 'किंग' या 'किंगमेकर'?
विरोधियों द्वारा 'वोट काटने वाला' (Spoiler) कहे जाने के बावजूद, विजय के समर्थक उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री मान रहे हैं। पेरम्बूर में एक कार्यकर्ता का कहना है, "यह मुकाबला अब डीएमके बनाम टीवीके है।" विजय ने अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह 'सीटी' (Whistle) रखा है और वे मुफ्त शिक्षा ऋण, बेरोजगारी भत्ता और स्थानीय रोजगार जैसे वादों के साथ मैदान में हैं।

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