ऐतिहासिक गलती: कभी सीएम नहीं रहीं विजयाराजे सिंधिया, फिर भी वेबसाइट पर दर्ज हुआ नाम
भोपाल। मध्यप्रदेश की विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है. ऑफिशियल वेबसाइट पर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची में विजयाराजे सिंधिया का नाम भी ‘भूतपूर्व मुख्यमंत्री’ के रूप में लिखा गया है. वेबसाइट के अनुसार विजयाराजे एमपी की 5वें नंबर की सीएम रहीं. जबकि वह कभी भी मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री नहीं रहीं. विधानसभा की वेबसाइट पर ‘मुख्यमंत्री’ वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों की सूची में पांचवें क्रम पर विजयाराजे सिंधिया का नाम दर्ज है। लेकिन उनके नाम के आगे एक स्टार (*) लगाया गया है. इसके अलावा सबसे नीचे स्पष्टीकरण भी दिया गया है, जिसमें लिखा कि “सामान्यतः मुख्यमंत्री ही सदन का नेता होता है, लेकिन चौथी विधानसभा में गोविंद नारायण सिंह के कार्यकाल के दौरान विजयाराजे सिंधिया सदन की नेता रहीं.” बता दें, इस सूची में विजयाराजे सिंधिया का जो कार्यकाल बताया गया है. उस दौरान मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में गोविंद नारायण सिंह और राजा नरेश सिंह कार्यरत थे. वहीं प्रदेश के जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर जारी आधिकारिक सूची में विजयाराजे सिंधिया का नाम नहीं है. जानकारी के अनुसार विधानसभा के सीनियर अधिकारियों को इस बात की जानकारी मिल चुकी है. उन्होंने भी गलती स्वीकार्य करते हुए जल्द ठीक करने की बात कही है.
कौन थीं विजयाराजे सिंधिया
विजयाराजे सिंधिया भारतीय राजनीति की एक प्रभावशाली हस्ती रही हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1957 में कांग्रेस पार्टी से की थी. गुना लोकसभा सीट से सांसद रहीं. हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. 1967 में वे जनसंघ में शामिल हुईं और करेरा विधानसभा सीट से विधायक बनीं. इसके बाद उन्होंने 1989, 1991, 1996 और 1998 में बीजेपी के टिकट पर गुना लोकसभा सीट से जीत दर्ज की. आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा था, जहां वे तिहाड़ जेल में बंद रहीं. उनका परिवार भी भारतीय राजनीति में काफी प्रभावशाली रहा. पुत्र माधवराव सिंधिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे, जबकि पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं. 25 जनवरी 2001 में उनका निधन हो गया.

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