इंदौर में फंगस वाले पानी से बनता मिला कफ सिरप, फार्मास्युटिकल्स कंपनी का नजारा देख हिल गई जांच टीम
इंदौर। मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीला कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब तक दोनों राज्यों में कुल 23 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें मध्य प्रदेश में 19 और राजस्थान में 4 बच्चों की मौत हुई है। घटनाओं के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और पंजाब सरकारों ने इस सिरप की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद सिरप बनाने वाली कंपनियां सुरक्षा मानकों और दवा निर्माण नियमों की अनदेखी करती नजर आ रही हैं।
इन्हीं घटनाओं के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और इंदौर की एआरसी फार्मास्युटिकल्स कंपनी पर भी शिकंजा कसा गया। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के निर्देश पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम ने इस कंपनी का रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन किया। तीन दिन चली इस जांच में कंपनी की स्थिति देखकर टीम के सदस्य दंग रह गए।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी में दवा निर्माण से जुड़े मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। यहां फंगस भरे पानी से कफ सिरप बनाया जा रहा था। तैयार सिरप को गंदे प्लास्टिक ड्रमों में रखा गया और बाद में बदबूदार कपड़ों से छानकर बोतलों में भरा गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कंपनी के पास डायएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की जांच की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। इन्हीं रसायनों की गलत मात्रा के कारण बच्चों की मौतें हुई थीं। इसके बावजूद कंपनी ने इन तत्वों की जांच के लिए न तो कोई लैब तैयार की और न ही मानक प्रक्रिया अपनाई।
जांच टीम को कंपनी परिसर में नीले रंग का एक बड़ा ड्रम मिला जिसमें करीब 50 से 60 लीटर सिरप सस्पेंशन था। जांच में यह भी पता चला कि सिरप में डालने के लिए शकर की चाशनी गैस स्टोव पर तैयार की जा रही थी, जो कि फार्मा निर्माण के सभी नियमों का उल्लंघन है।
इसके अलावा पैरासिटामोल, फिनाइलेफेरिन हाइड्रोक्लोराइड और क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट सस्पेंशन के स्टॉक मिले जिनकी लेबलिंग अधूरी थी। बोतलों पर चेतावनी नहीं दी गई थी कि यह दवा चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं है।
कंपनी में रिजेक्ट दवाओं के लिए अलग से कोई स्टोरेज एरिया नहीं था। कर्मचारी बिना यूनिफॉर्म या सेफ्टी गियर के, यहां तक कि बाहर के जूते-चप्पल पहनकर भी दवा उत्पादन कर रहे थे। एयर हैंडलिंग यूनिट और एयर कंडिशनर काम नहीं कर रहे थे, जिससे उत्पादन के दौरान आवश्यक तापमान भी नियंत्रित नहीं रह पाता था।
टीम ने 27 से 29 सितंबर के बीच यह निरीक्षण किया था, जिसके बाद कंपनी में सिरप उत्पादन तत्काल रोक दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गंभीर लापरवाही पर अब सख्त कार्रवाई तय है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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