अस्पताल लाने वाले समाजसेवी को 150 कॉल, मासूम को गोद लेने की लगी होड़
बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला मुख्यालय के समीप नर्मदा नदी के 100 फ़ीट ऊंचे पुल से कूदे दंपति ने अपना 3 महीने का शिशु वहीं छोड़ दिया था। अब उसे अडॉप्ट करने वालों की भीड़ लग गई है। इस बीच महिला का शव आज नर्मदा नदी से निकाल लिया गया, जबकि उसके पति की खोज जारी है।
समाजसेवी की रातों की नींद हराम
दंपति के नर्मदा नदी से कूदने के बाद पुल पर पड़े सुंदर और स्वस्थ बालक शिशु को 5 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचाने वाले समाजसेवी अजीत जैन की नींद हराम हो गयी है। उन्होंने बताया कि उन्हें घटना के बाद से करीब डेढ़ सौ फोन आ चुके हैं। इसमें से अधिकांश उनसे उस बालक शिशु को अपनाने की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें इंदौर, धार ,अलीराजपुर, जिलों के अलावा बड़वानी और सेंधवा से भी फोन आए हैं।
बच्चे को अडॉप्ट करने का होता है प्रोसेस
उन्होंने बताया कि शिशु यह बच्चे को अडॉप्ट करने की एक प्रक्रिया होती है। यह सीधे किसी को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा सबसे पहला हक तो उनके परिवार का ही होगा, यदि वे अपने से इनकार करते हैं तो इस चिल्ड्रन बैंक में भेज दिया जाएगा।
पुल से 80 मीटर दूर मिला महिला का शव
इस बीच अपने पति के साथ कूदी महिला का शव एसडीआरएफ की टीम ने पुल से 80 मीटर दूर ढूंढ निकाला। उसकी शिनाख्त बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के बंदर कच्छ निवासी 20 साल की जागृति बडोले के रूप में हुई है। उसके पति 22 वर्षीय नीलेश बडोले की खोज आज शाम तक की गई लेकिन उसका फिलहाल पता नहीं चला है।
धार के अस्पताल में हुआ पोस्टमार्टम
जागृति के शव को धार जिले के कुक्षी स्थित शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उसका पोस्टमार्टम किया गया। दरअसल बड़वानी से 5 किलोमीटर दूर छोटी कसरावद स्थित नर्मदा नदी का आधा पुल का हिस्सा बड़वानी और शेष आधा धार जिले में आता है।
परिजन भी कर रहे आश्चर्य
निलेश बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के बोदरा गांव का निवासी है। परिजनों के अनुसार वे कल गुजरात के सूरत मजदूरी करने जा रहे थे। वे भी आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि दोनों ने अपने 3 महीने के शिशु को पुल पर लावारिस छोड़कर नर्मदा में क्यों छलांग लगा दी। उधर आज बाल कल्याण समिति ने जिला अस्पताल में विज़िट कर पीआईसीयू में भर्ती 3 महीने के शिशु के हाल-चाल जाने और आवश्यक निर्देश दिए।

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