मध्यप्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष के साथ जागी दिग्गजों की उम्मीदें, मंत्रीमंडल विस्तार की अटकलें तेज
सागर : पिछले कई महीनों से बेसब्री से मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव का इंतजार चल रहा था. हर किसी के मन में यही सवाल था कि वीडी शर्मा के बाद कौन सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालेगा. वहीं अब कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद जल्द ही मंत्रीमंडल का फिर विस्तार होगा, इससे सीनियर लीडर्स की उम्मीदें फिर जाग गई हैं.
नाराज चल रहे हैं पार्टी के कई नेता
दरअसल, जब से प्रदेश में मोहन यादव सरकार बनी है, कई दिग्गजों को सरकार में शामिल ना करके नए नवेले चेहरों को जगह दी गई है. तब से कई सीनियर नेताओंं की नाराजगी खुले आम देखने मिल रही है. वहीं कई दिग्गज चुपचाप मंत्रीमंडल में जगह पाने के लिए तिकड़म भी लगा रहे हैं.
इन नेताओं को फिर एक आस
वैसे तो मध्यप्रदेश में लगभग हर अंचल में कई ऐसे दिग्गज भाजपा नेता हैं, जो मंत्रीमंडल में जगह पाने के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन बुंदेलखंड के दिग्गजों को भी मंत्रीमंडल विस्तार का इंतजार है. क्योकिं इन्हें प्रदेश अध्यक्ष के चयन तक इंतजार करने को कहा गया था. इन नेताओं में गोपाल भार्गव, जयंत मलैया और भूपेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं.
मंत्रीमंडल विस्तार के पार्टी ने दिए थे संकेत
मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के साथ मोहन यादव मंत्रीमंडल विस्तार की अटकलें भी तेज हो गई हैं. इन कयासों के पीछे चर्चा है कि पिछले दिनों पार्टी के दिग्गज नेताओं की नाराजगी जब खुलकर सतह पर आने लगी थी, तब संगठन और सरकार ने इन दिग्गजों को मनाने के लिए कहा था कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद मोहन यादव मंत्री मंडल में विस्तार के साथ फेरबदल भी होगा और कई वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो मिलेगी.
सीएम का भी नहीं चल रहा जोर?
मध्य प्रदेश भाजपा में दिग्गज नेताओं की नाराजगी भारी पड़ रही थी. मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इन दिग्गजों को वरिष्ठता के चलते शांत नहीं कर पा रहे थे. हालांकि, पहले पार्टी ने कहा था कि फरवरी तक प्रदेश अध्यक्ष का चयन हो जाएगा, लेकिन नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर जुलाई में मुहर लग पाई है.
बुंदेलखंड के दिग्गजों को बेसब्री से इंतजार
वैसे तो पूरे मध्यप्रदेश में बीजेपी के कई दिग्गज और वरिष्ठ विधायक मंत्रीमंडल में पद हासिल करने के दावेदार हैं. लेकिन बुंदेलखंड में ये मामला थोड़ा ज्यादा गंभीर है. क्योकिं यहां पर वरिष्ठ विधायकों की संख्या कुछ ज्यादा है और पिछली सरकारों में इन दिग्गजों के पास भारी भरकम विभाग भी रहे हैं, जिनमें गोपाल भार्गव, जयंत मलैया और भूपेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं.
इसके अलावा बृजेन्द्र प्रताप सिंह और ललिता यादव जैसे नाम भी कतार में है. गोपाल भार्गव तो सबसे ज्यादा लगातार 9 चुनाव जीत चुके हैं. वहीं, जयंत मलैया और भूपेन्द्र सिंह बडे़-बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
बुंदेलखंड में मिला नए चेहरों को मौका
मोहन यादव मंत्रीमंडल की बात करें, तो बुंदेलखंड में एक मात्र कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत हैं, जो सिंधिया खेमे से हैं. इसके अलावा यहां पर कोई भी कैबिनेट मंत्री नहीं है. वहीं दूसरी ओर दमोह से दो राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी और लखन पटेल हैं. तो पन्ना से दिलीप अहिरवार को राज्यमंत्री बनाया गया है.
क्या कहते हैं जानकार?
वरिष्ठ पत्रकार देवदत्त दुबे कहते हैं, '' प्रदेश अध्यक्ष चुनाव में देरी के चलते संगठन और सरकार के कई तरह के कामकाज लंबित थे. अब संगठन और सरकार दोनों एक्टिव मोड में नजर आएंगे. मंत्रीमंडल का विस्तार भी इसलिए रूका था क्योकिं प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी का इंतजार किया जा रहा था. इसी तरह निगम मंडल की नियुक्ति, संगठन में प्रदेश और जिला कार्यकारिणियों का गठन कई ऐसे काम है, जो अब तेजी पकड़ेंगे. बीजेपी सरकार और संगठन दोनों एक्टिव मोड में नजर आएंगे, मंत्रीमंडल विस्तार बहुत जल्द हो सकता है.''

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