कब गिरते हैं बच्चों के दूध के दांत? जानिए सही उम्र
बच्चों में दूध के दांत गिरने में कभी-कभी देर हो जाती है, लेकिन अगर ज्यादा समय बीत जाने पर भी दूध के दांत नहीं गिर रहे या स्थायी दांत निकलने में मुश्किल हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
क्यों देर से गिरते हैं बच्चों के दूध के दांत? जानिए डॉक्टर की सलाह
बचपन में पहले दूध के दांत आना, फिर उनका गिर जाना और उनकी जगह स्थायी दांतों का आ जाना एक सामान्य प्रक्रिया है. आमतौर पर बच्चों में दूध के दांत 6-7 साल की उम्र में गिरने शुरू हो जाते हैं और उनकी जगह 12-13 साल की उम्र तक स्थायी दांत आ जाते हैं. लेकिन कई बार दूध के दांत गिरने में ही काफी देर हो जाती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चों में दूध के दांत गिरने में देरी क्यों होती है और ऐसे में क्या करना चाहिए. दिल्ली एम्स में पीडियाट्रिक विभाग के पूर्व डॉ. राकेश बागड़ी कहते हैं कि कैल्शियम, विटामिन डी और दूसरे पोषक तत्वों की कमी से दांतों का विकास और दूध के दांतों का गिरना दोनों ही प्रभावित हो सकते हैं. खासकर कैल्शियम की कमी की वजह से दांत और हड्डियां कमजोर हो सकती हैं.
स्थायी दांतों का धीमा विकास
जबड़े के अंदर स्थायी दांत बनने और उनके बाहर आने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. ऐसे में दूध के दांत अपनी जगह पर ही बने रहते हैं, क्योंकि उनकी जगह लेने वाला दांत समय पर बाहर नहीं आ रहा.
प्राकृतिक अंतर और आनुवांशिकता
हर बच्चे का विकास अलग तरह होता है. लिहाजा दूध के दांतों के गिरने का समय भी अलग-अलग हो सकता है. इसके अलावा अगर माता-पिता या भाई-बहनों के दांत भी देर से गिरे हैं, तो बच्चे में ये देरी सामान्य मानी जा सकती है.
दूध के दांतों की मजबूत जड़ें
कभी-कभी दूध के दांत की जड़ पूरी तरह खत्म नहीं है, जिससे वह दांत अपनी जगह पर बना रहता है, इस कारण भी स्थायी दांत निकलने में दिक्कत आ सकती है.
डॉक्टर से कब मिलें?
हालांकि कुछ बच्चों में दूध के दांत गिरने में देरी हो सकती है, लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें डॉक्टर से सलाह ले लेना बेहतर होता है. आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही परिस्थितियों के बारे में.
7-8 साल की उम्र तक अगर दांत ढीले नहीं पड़ते या गिरना शुरू नहीं हो रहे हैं.
अगर किसी बच्चे के दूध के दांत 9-10 साल की उम्र में भी जमे हुए हैं.
स्थायी दांत या मसूड़ों में दिखने तो लगे हैं, लेकिन दूध के दांत अभी भी अपनी जगह पर जमे हुए हैं.
अगर कोई बच्चा दांतों की वजह से ठीक से खाना नहीं खा पा रहा है या बोलने में मुश्किल हो रही है.
दांतों में दर्द, सूजन या संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगें.
दूध के दांत देर से गिरने के नुकसान
दांतों का टेढ़ा हो जाना
अगर किसी बच्चे के दूध के दांत समय पर नहीं गिरते हैं, तो स्थायी दांतों के गलत दिशा में निकलने की आशंका रहती है.
ओवरक्राउडिंग
दूध के दांत देर से गिरने की स्थिति में स्थायी दांत निकलने में मुश्किल आ सकती है, ऐसे में एक ही जगह पर दो दांत निकल सकते हैं, जिससे सफाई करने में परेशानी हो सकती है या कैविटी का खतरा बढ़ सकता है.
मसूड़ों में संक्रमण
अगर किसी बच्चे के दूध के दांत लंबे समय तक नहीं गिरते हैं, ऐसे में मसूड़ों में सूजन या संक्रमण आने की आशंका बढ़ जाती है.
कैसे करें बच्चों के दांतों की देखभाल?
डॉ. राकेश बागड़ी बताते हैं कि बच्चे में दांतों की सफाई और अच्छी तरह से ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए. दिन में दो बार ब्रश करना अच्छा होता है.
बच्चों को मीठी चीजें, सॉफ्ट ड्रिंक और चिपचिपे स्नैक्स बहुत ज्यादा न दें.
बच्चों के खाने में कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर चीजें शामिल करें.
हर 6 महीने में डेंटिस्ट से चेकअप करवाना बेहतर होता है और अगर दांत गिरने में या निकलने में मुश्किल हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह करना अच्छा है.
दांत गिरने के बाद मसूड़ों की सफाई का ध्यान रखें और खून आने पर गुनगुने पानी से कुल्ला कराएं.

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