जबलपुर में फर्जी डॉक्यूमेंट से MBBS करने वाला युवक बना 'मुन्ना भाई डॉक्टर', रेलवे अधिकारी की मां की मौत पर हुआ खुलासा
जबलपुर: जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए न सिर्फ MBBS की पढ़ाई की, बल्कि निजी अस्पताल में डॉक्टर बनकर नौकरी भी करता रहा. यह फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ, जब एक रेलवे अधिकारी की मां की इलाज के दौरान मौत हो गई.
क्या है पूरा मामला?
मामला मार्बल सिटी अस्पताल का है, जहां रेलवे अस्पताल से रेफर की गई एक महिला को भर्ती कराया गया था. रात में हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर की आवश्यकता बताई गई, लेकिन दस्तावेजों में यह दर्ज था कि परिजनों ने वेंटिलेटर से इनकार किया, जबकि ऐसा कोई सवाल ही नहीं किया गया था. इसी बात से संदेह हुआ और रेलवे अधिकारी ने इलाज करने वाले डॉक्टर की पड़ताल शुरू की.
नाम बदलकर कर रहा था काम
जांच में पता चला कि जिस डॉक्टर बृजराज उईके के नाम से युवक अस्पताल में काम कर रहा था, असल में वह सत्येंद्र निषाद नाम का युवक है. जिसने असली बृजराज के दस्तावेज चुराकर MBBS की पढ़ाई पूरी की थी. सत्येंद्र ने आदिवासी कोटे का लाभ उठाकर साल 2018 में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और दो साल तक सरकारी अस्पताल में भी काम किया.
पुलिस में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने जब सत्यापन किया तो सामने आया कि असली बृजराज कटनी में पेंटर का काम करता है और 2012 में उसने दस्तावेज गुम होने की रिपोर्ट भी लिखाई थी. सत्येंद्र के खिलाफ ओमती थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी और आरक्षण के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया है.
फरार है सत्येंद्र
फिलहाल सत्येंद्र फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है. यह मामला न केवल मेडिकल सिस्टम की चूक को उजागर करता है, बल्कि आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

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