घना जंगल, बढ़ते बाघ: 50 गांवों का होगा निस्तारण
नर्मदापुरम: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके लिए जंगल में उनका रहवास क्षेत्र भी बढ़ाया जा रहा है. यही कारण है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 50वें गांव के विस्थापन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसके बाद सबसे अधिक विस्थापन के मामले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व देश में अग्रणी हो जाएगा.
बाघों के रहवास और उनकी सुरक्षा पर कई काम
यहां हुए व्यवस्थित विस्थापन की प्रक्रिया देखने के लिए हाल ही में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के इंस्पेक्टर जनरल ने विस्थापित गांवों का दौरा किया है. जिसमें उन्होंने यहां हुए विस्थापन को देश का सबसे अच्छा विस्थापन बताया है. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पिछले 15 सालों में बाघों के रहवास और उनकी सुरक्षा पर कई काम किए गए हैं. इसी कड़ी में घने जंगल से वनवासियों को हटाकर दूसरे स्थान पर विस्थापित करने की प्रक्रिया सबसे अहम रही है.
17 वर्ष पहले शुरू हुई विस्थापन की प्रक्रिया
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से वर्ष 2007 में 43 गांव विस्थापित की रूपरेखा बनाई गई थी. जिसमें कोर और बफर जोन शामिल थे. धीरे धीरे अब तक 49 वन ग्राम पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं. जिसमें 36 कोर जोन से तो 13 बफर जोन से खाली हुए हैं. वहीं तीता गांव का 50वां विस्थापन किया जा रहा है. अभी 5 अन्य वन ग्रामों को विस्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है.
कैमरे में दिख रहे 64 बाघ
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व 2133 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पिछले साल बाघ के शिकार का मामला सामने आया था. पूर्व में भी यहां अंतरराष्ट्रीय शिकारी पकड़े गए थे, लेकिन इसके बाद भी बाघों की भरमार है. सतपुड़ा में लगाए गए कैमरे में वर्तमान में 64 बाघ दिखाई दे रहे हैं.
अच्छी सुविधा देने के लिए विस्थापन
जंगल में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण उनका रहवास क्षेत्र कम हो रहा था. वही जंगल में बसे वनवासियों के कारण कहीं ना कहीं वन्यप्राणी की सुरक्षा खतरे में पड़ रही थी. इसके आलावा वनवासियों को जंगल से निकालकर अच्छी सुविधा देने के लिए विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई.जंगल में घास-फूस की झोपड़ी की जगह कॉलोनीनुमा गांव बसा दिया. जंगल की पगडंडी की जगह पक्की सड़क, बिजली, पानी की सुविधा दे दी गई. वनवासियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के कारण ही सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन को कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थर्ड एशिया मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस ऑन टाइगर कंजर्वेशन में सम्मान दिया था.
विस्थापन का आदर्श गांव कांकड़ी
सेमरी हरचंद के पास विस्थापित हुआ कांकड़ी गांव अब आदर्श गांव कहलाता है. यहां की बसाहट, सुविधा, हरियाली, स्वच्छता आदि को लेकर इसे आदर्श गांव घोषित किया गया है.
विस्थापन में मिली सुविधाएं
विस्थापित गावों में सीमेंट की पक्की सड़क बनाई गई है.
घने जंगल से हटाकर शहर के नजदीक बसाहट दी गई.
बच्चों के लिए स्कूल और सामुदायिक भवन बनाए.
बिजली और सौर ऊर्जा का विकल्प भी दिया.
घर में गैस और सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक उपकरण दिए.
रोजगार के लिए कुछ योजना में 10 लाख कैश या परिवार को 5 एकड़ तक भूमि दी.
गांव में पानी के लिए ट्यूबवेल, स्टॉपडेम और लघु उद्योग के साधन दिए.
'वनवासियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा '
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि "बाघों के रहवास और उनकी सुरक्षा को लेकर विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है. वनवासियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए सतपुड़ा में विस्थापन का काम लगातार जारी है. इसी को लेकर केंद्र की टीम ने विस्थापित गांव का दौरा किया था. जिसमें उन्होंने यहां की बसावट और वनवासियों को मिल रही सुविधा को लेकर इसे अच्छा विस्थापन बताया है."

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