पीरियड्स में दलित छात्रा से भेदभाव, क्लास से बाहर बैठाकर दिलवाया एग्जाम
पीरियड्स शायद एक ऐसा टॉपिक है जिस पर अब बहुत हद तक बात की जा सकती है, कई लोगों को यह लगने लगा है कि पीरियड्स को लेकर किसी भी तरह की धारणा और रूढ़िवादी सोच से हम आजाद हो गए हैं, लेकिन हाल ही में तमिलानाडु के कोयंबटूर से आया केस बताता है कि अभी भी पीरियड्स को लेकर हम काफी आगे नहीं पहुंच पाए हैं.
अकसर टीवी पर पीरियड्स के एडवरटाइजमेंट के दौरान आपने देखा होगा कि परीक्षा में पीरियड्स से आप परेशान न हो और आराम से एग्जाम दे सके इसके लिए इस ब्रांड का पेड यूज करें, लेकिन क्या हो अगर 8वीं क्लास की 13 साल की बच्ची को पहली बार पीरियड्स आए और उसको क्लास से बाहर सीढ़ियों पर बैठ कर एग्जाम देना पड़े. हाल ही में कोयंबटूर के एक प्राइवेट स्कूल से ऐसा ही वीडियो सामने आया है. जहां 13 साल की दलित छात्रा को पीरियड्स के चलते क्लास से बाहर सीढ़ियों पर बैठकर एग्जाम देना पड़ा.
स्कूल प्रिंसिपल सस्पेंड
इस केस के सामने आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही स्कूल की प्रिंसिपल पर भी एक्शन लिया गया है. स्कूल एजुकेशन के शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने कहा, डिपार्टमेंट बच्ची के साथ खड़ा है. स्कूल की प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है. हालांकि, इस केस में बच्ची की मां को लेकर एक ऐसा एंगल सामने आया है जो हैरान कर देता है और सवाल पूछने पर मजबूर कर देता है कि क्या इस मामले में बच्ची की मां भी जिम्मेदार थी?
क्या मां भी थी जिम्मेदार
मंत्री ने कहा, निजी स्कूल के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. हालांकि, शुरुआती जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है जो आपको हैरान कर देगा. दरअसल, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह छात्रा की मां ही थी जिसने बेटी के पहले पीरियड्स के चलते स्कूल प्रबंधन से छात्रा के लिए एक अलग व्यवस्था करने का अनुरोध किया था.
पुलिस ने लिया एक्शन
इस मामले के चलते कोयंबटूर पुलिस ने देर रात की कार्रवाई में स्कूल के कॉरस्पॉडेंट सहित तीन लोगों के खिलाफ अत्याचार निवारण (एससी/एसटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस घटना से काफी आक्रोश फैल गया और कई कार्यकर्ताओं ने छात्रा को क्लास से बाहर बैठाकर एग्जाम देने के स्कूल के फैसले पर सवाल उठाए हैं. इसी के साथ सोशल मीडिया पर भी सामने आई वीडियो के बाद इस हरकत को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं.

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