जब मुख्य मंत्री पद संभालते है तो सबसे ज्यादा भला उस क्षेत्र व उस शहर के लोगों का होता है, जहां से सीएम का संबंध होता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लोग अर्जुन सिंह के मुख्य मंत्रित्वकाल में देख चुके हैं. जब वहां के लोगो का हर काम विन्ध्य क्षेत्र से है, कहने भर से चुटकियों में हो जाता था। अब ऐसा ही हाल प्रदेश के मुख्य मंत्री डा. मोहन यादव के राज में हो रहा है। भले ही आम उज्जैनवासी उनके नाम का लाभ न उठा रहे हो, लेकिन महाकाल की नगरी से संबंध रखने वाले एक अधिकारी उसका भरपूर लाभ उठा रहे है। ये महाषय है श्रीराम तिवारी, जिनका दावा है कि मोहन भैया उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं। श्रीराम तिवारी के इस दावे मे दम भी दिखता है क्योंकि मोहन भैया ने उज्जैनवासी बड़े भाईजी का सम्मान करते हुए उन्हें अपना संस्कृति सलाहकार मनोनीत किया है। बता दे कि श्रीराम तिवारी को जब पहले ही एक संघ नेता की सिफारिश पर भोपाल लाया गया था तब मोहन यादव का कही अत्ता पत्ता नहीं था। मगर वरिष्ठ अफसरों, सत्ता से जुड़े लोगों को पढ़ाने में माहिर श्रीराम तिवारी, जिस विभाग में रहे उनका एकक्षत्र राज रहा। संस्कृति संचालनालय तो उन्हीं के नाम से जाना जाता था। विवादों में रहने के बावजूद श्रीराम तिवारी का बाल भी बांका नही हुआ और रसूख की वजह से रिटाटारमेंट के बाद भी वे मलायीदार पद पर काबिज होते रहे। श्रीराम तिवारी मुख्यमंत्री यादव के सलाहकार बनने के बाद भी, संस्कृति विभाग के माई बाप हैं। माना जाता है कि जिस पर राम की कृपा होती है उस पर सभी कृपा करते हैं यहां तो मोहन की कृपा राम पर हुयी है।